संस्थापक एवं मुख्य शोधकर्ता

Hindi eTools के संस्थापक

उदयवीर सिंह Udayvir Singh

संस्थापक एवं मुख्य शोधकर्ता, Hindi eTools

Hindi eTools केवल एक उपयोगिता मंच नहीं है, बल्कि यह सूचना प्रौद्योगिकी और हिंदी भाषा के अंतर्संबंधों पर आधारित एक निरंतर चलने वाला व्यावहारिक शोध है। इस मंच की स्थापना और परिकल्पना डिजिटल युग में हिंदी के उपयोग को सहज, मानक और सर्वसुलभ बनाने के उद्देश्य से की गई है।

परिचय

संस्थापक की शैक्षणिक पृष्ठभूमि बहु-विषयक है और उन्हें कॉरपोरेट क्षेत्र में नेतृत्व का व्यापक अनुभव प्राप्त है। वे वर्तमान में कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) में वरिष्ठ प्रबंधक (E6 ग्रेड) के पद पर कार्यरत हैं और इसकी अनुषंगी कंपनी वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) के राजभाषा विभाग में पदस्थापित हैं। इससे पूर्व, वे कोल इंडिया की एक अन्य अनुषंगी कंपनी, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) में निगमित संचार एवं जनसंपर्क विभाग के प्रमुख के रूप में कार्य कर चुके हैं। कोल इंडिया लिमिटेड में आने से पहले वे बैंकिंग क्षेत्र में भी अधिकारी रहे हैं। उनका उद्देश्य कॉरपोरेट जगत में अर्जित अपने अनुभव और भाषाई शोध को अकादमिक क्षेत्र से जोड़ना है, ताकि प्रबंधन और संचार के क्षेत्र में भावी पीढ़ी को व्यावहारिक ज्ञान, नई दृष्टि और बेहतर मार्गदर्शन प्रदान किया जा सके।

अकादमिक यात्रा और शोध

एक ग्रामीण कृषि परिवार से आने और परिवार में 10वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले प्रथम सदस्य होने से लेकर शोध के उच्चतम स्तर तक पहुँचने की यह यात्रा निरंतर सीखने और अकादमिक उत्कृष्टता के प्रति उनके समर्पण को दर्शाती है।

पीएचडी (PhD): हिंदी विषय में शोध-प्रबंध प्रस्तुत किया जा चुका है; मौखिकी (Viva Voce) शेष है। शोध का विषय है — “इक्कीसवीं सदी में सूचना प्रौद्योगिकी का विकास और हिंदी भाषा व साहित्य पर उसका प्रभाव।” यह वेबसाइट इसी शोध का एक जीवंत और व्यावहारिक अनुप्रयोग है।

बहु-विषयक शैक्षणिक पृष्ठभूमि: कला स्नातक (BA), शिक्षा स्नातक (B.Ed.), हिंदी भाषा एवं साहित्य में स्नातकोत्तर (MA) तथा संस्कृत एकल विषय में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। इसके साथ ही, वर्ष 2012 में हिंदी विषय में यूजीसी-नेट (UGC-NET) परीक्षा उत्तीर्ण की।

पेशेवर और प्रशासनिक अनुभव

  • बैंकिंग क्षेत्र में प्रारंभिक अनुभव (2009–2013): उनके पेशेवर जीवन की शुरुआत IDBI बैंक में सामान्य बैंकिंग और वित्तीय परिचालन के क्षेत्र में हुई, जहाँ उन्होंने लगभग तीन वर्षों तक कार्य किया। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा में राजभाषा अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने संघ की राजभाषा नीति के क्रियान्वयन तथा तकनीकी एवं वित्तीय दस्तावेज़ों के अनुवाद की जिम्मेदारी संभाली। इस अनुभव ने राजभाषा के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता को सुदृढ़ आधार प्रदान किया, जिसे वर्ष 2013 से कोल इंडिया समूह में निरंतर एक दशक से अधिक की सेवा के दौरान और अधिक विस्तार व गहराई मिली।
  • राजभाषा कार्यान्वयन: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) में वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर राजभाषा नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन, कॉरपोरेट गृह-पत्रिकाओं के संपादन तथा प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान; साथ ही नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों (धनबाद एवं नागपुर) के सदस्य-सचिव के दायित्वों का निर्वहन।
  • निगमित संचार एवं जनसंपर्क (2022–2025): कोल इंडिया की एक अनुषंगी कंपनी BCCL में कॉरपोरेट कम्युनिकेशन एवं जनसंपर्क विभाग के प्रमुख के रूप में कार्य किया। इस दौरान बड़े संगठनात्मक ढाँचे में ब्रांड स्टेशनरी के मानकीकरण तथा कंपनी के लोगो के आधिकारिक ट्रेडमार्क पंजीकरण की प्रक्रिया का नेतृत्व किया। यह कार्य कंपनी की ब्रांड पहचान को सुदृढ़ करने और कॉरपोरेट संचार में एकरूपता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण रहा। यह अनुभव दृश्य संचार, ब्रांड प्रबंधन और संस्थागत पहचान के क्षेत्र में उनकी दक्षता को भी दर्शाता है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी संसाधन वक्ता के रूप में आमंत्रण: भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग ने यूनिकोड एवं हिंदी कंप्यूटिंग से संबंधित क्षेत्रीय तकनीकी संगोष्ठियों में उन्हें दो बार आमंत्रित किया। ये संगोष्ठियाँ कोलकाता और बेंगलुरु में आयोजित हुईं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने IIT/ISM धनबाद, NIT दुर्गापुर, SBI और SAIL सहित देश के 30 से अधिक केंद्रीय संस्थानों में प्रशिक्षण सत्र संचालित किए। इन प्रयासों के माध्यम से उन्होंने हिंदी कंप्यूटिंग, यूनिकोड और डिजिटल माध्यमों में हिंदी के प्रभावी उपयोग से संबंधित तकनीकी ज्ञान को विभिन्न संस्थानों तक पहुँचाया।
एक कार्यक्रम में संबोधन करते हुए
एक कार्यक्रम में संबोधन करते हुए (सितंबर 2016)

‘Hindi eTools’ की परिकल्पना एवं उद्देश्य

सूचना प्रौद्योगिकी के निरंतर विकास के साथ हिंदी को डिजिटल माध्यमों में सहज, सटीक और एकरूप रूप से उपयोग करने की आवश्यकता भी बढ़ी है। विशेष रूप से देवनागरी लिपि के मानकीकरण और पुराने फॉन्ट-आधारित दस्तावेज़ों को आधुनिक तकनीकी प्रणालियों के अनुरूप बनाने में कई चुनौतियाँ सामने आती रही हैं।

इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ‘Hindi eTools’ की परिकल्पना की गई। इसका उद्देश्य Kruti Dev जैसे पुराने फॉन्ट और आधुनिक यूनिकोड प्रणाली के बीच की भाषाई एवं तकनीकी दूरी को कम करना है, ताकि हिंदी में डिजिटल कार्य अधिक सरल, सुलभ और प्रभावी हो सके।

यह मंच भाषा प्रौद्योगिकी, प्रशासनिक दक्षता, और अकादमिक शोध के उद्देश्यों के प्रति समर्पित है।

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