हिंदी साहित्य और भाषा विज्ञान

हिंदी साहित्य का इतिहास, साहित्यिक काल और भाषा विज्ञान के मूल विषयों पर आलेख।

रीतिकाल का नामकरण और औचित्य

हिंदी साहित्य के काल विभाजन और नामकरण में आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा तत्कालीन युगीन प्रवृत्तियों को सर्वाधिक प्राथमिकता दी गई है। विभिन्न प्रवृत्तियों की प्रमुखता के आधार पर ही उन्होने साहित्य के अलग-अलग कालखण्डों का नामकरण किया है। इसी मापदंड को अपनाते हुए हिंदी साहित्य के उत्तर मध्य काल अर्थात 1700-1900 वि. के कालखण्ड में

भाषा का उद्भव और विकास

कई साल पहले अत्यंत प्रिय मेरी मौसी को दिल का दौरा पड़ गया। अचानक उत्पन्न यह परिस्थिति मेरे लिए वज्रपात से कम नहीं थी। मैं बुरी तरह से घबरा गया। क्योंकि मौसी मेरे दिल के सबसे करीब थी। उनके बगैर जीवन की कल्पना भी मेरे लिए मुश्किल थी। सुखद आश्चर्य के तौर पर कुछ घंटों

भक्तिकालीन हिंदी साहित्य और तत्कालीन परिस्थितियाँ

हिंदी साहित्य के कालविभाजन और नामकरण के आधार पर संवत 1375-1700 वि. तक के कालखण्ड में सृजित हिंदी साहित्य में भक्ति भावना की प्रधानता होने के कारण आचार्य शुल्क ने इस काल को भक्तिकाल का नाम दिया है। प्रमुख आलोचक डा. नगेन्द्र ने इस समय सीमा को 1350-1650 ई. माना है। आदिकाल के वीरता और

हिंदी की दुनिया और दुनिया में हिंदी

वैश्विक स्तर पर विभिन्न भाषाओं की प्रभावशीलता से संबंधित “Power Language Index” नाम से जारी एक हालिया शोध के परिप्रेक्ष्य में हिंदी की वैश्विक स्थिति और हकीक़त से रूबरू कराता एक विश्लेषणात्कम लेख। अभी हाल ही में एक खबर आयी थी वैश्विक स्तर पर दुनिया की सर्वाधिक प्रभावशाली 124 भाषाओं में हिंदी का 10वां स्थान

हिंदी की फुल स्पीड

जब मैंने होश संभाला तो देश में हिंदी के विरोध और समर्थन दोनों का मिला-जुला माहौल था। एक बड़ी संख्या में लोग हिंदी प्रेमी थे, जो लोगों से हिंदी अपनाने की अपील किया करते थे। वहीं दक्षिण भारत के राज्यों, खासकर तमिलनाडु में हिंदी के प्रति हिंसक विरोध की खबरें भी जब-तब सुनने-पढ़ने को मिला

हिंदी साहित्य का आदिकाल : नामकरण और औचित्य

हिंदी साहित्य को एक व्यवस्थित स्वरूप में प्रस्तुत करने के उद्देश्य से विद्वानों ने साहित्य के इतिहास को कई काल-खण्डों में विभाजित किया है। साहित्य के काल विभाजन के बाद अध्ययन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तथा तत्कालीन प्रवृत्तियों व समय के अनुरूप प्रत्येक काल-खण्ड को एक अलग नाम दिया गया, यथा- आदिकाल,

हिंदी भाषा : उत्पत्ति और विकास

हिन्दी भारोपीय परिवार की आधुनिक काल की प्रमुख भाषाओं में से एक है। भारतीय आर्य भाषाओं का विकास क्रम इस प्रकार है- संस्कृत>> पालि >> प्राकृत >> अपभ्रंश >> हिन्दी व अन्य आधुनिक भारतीय आर्य भाषाएँ। आधुनिक आर्य भाषाएँ उत्तर भारत में बोली जाती हैं। दक्षिण भारत की प्रमुख भाषाएँ तमिल (तमिलनाडु), तेलुगू (आंध्र प्रदेश),

हिन्दी साहित्य का इतिहास : काल विभाजन एवं नामकरण

इतिहास के काल विभाजन का आधार एवं उद्देश्य : समग्र साहित्य को खंडों, तत्वों, वर्गों आदि में विभाजित कर अध्ययन को एक वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान करने के लिए साहित्य का काल विभाजन आवश्यक हो जाता है। इससे साहित्य के विभिन्न अंग, उपांग तथा प्रवृत्तियों को समझने एवं उनमें स्पष्टता लाने में भी मदद मिलती है।

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