2018-10-01


इंटरनेट आज के समय का एक ऐसा आविष्कार है जिसने पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया है। यह इंटरनेट का ही कमाल है कि आज हम पूरी दुनिया को एक वैश्विक गांव (Global Village) के रूप में देखते हैं। इंटरनेट, वर्ल्ड वाइड वेब (www) या सूचना प्रौद्योगिकी के कारण ही आज सूचनाओं, संदेश अथवा डाटा का आदान-प्रदान इतनी तीव्र गति से होने लगा है कि कभी-कभी हमें यह कल्पना मात्र प्रतीत होता है। आइए ! इंटरनेट क्या है, इसका आविष्कार किसने किया, इंटरनेट का मालिक कौन है, इंटरनेट कैसे काम करता है, इंटरनेट के लाभ एवं हानि तथा मानव जीवन और समाज पर इसके व्यापक प्रभाव आदि के बारे में कुछ विस्तार से जानते हैं: -

इंटरनेट की परिभाषा :-

इंटरनेट शब्द का हिंदी अनुवाद अंतरजाल होता है लेकिन अधिकतर सभी भाषाओं में इसका मूल अंग्रेज़ी शब्द INTERNET ही व्यापक प्रचलन में है। संक्षिप्त रूप में इंटरनेट को ‘नेट’ भी कहा जाता है। जैसा कि हम जानते हैं 'नेट (Net)' का अर्थ जाल होता है; वास्तव में इंटरनेट भी एक जाल ही तो है। प्रसिद्ध सूचना वेबसाइट विकीपीडिया के अनुसार - "इंटरनेट विश्व में डिवाइसों / कंप्यूटरों को लिंक करने के लिए इंटरनेट प्रोटोकॉल सूट (TCP / IP) का उपयोग करने वाले इंटरकनेक्टेड (आपस में जुड़े हुए) कंप्यूटर नेटवर्क की एक वैश्विक प्रणाली है। यह नेटवर्क का एक नेटवर्क है जिसमें निजी, सार्वजनिक, शैक्षिक, व्यवसायिक और वैश्विक नेटवर्क शामिल हैं, जो कि इलेक्ट्रॉनिक, वायरलेस, और ऑप्टिकल नेटवर्किंग प्रौद्योगिकियों की व्यापक श्रेणी से जुड़ा हुआ है।"

अगर सरल शब्दों में कहें तो हम कह सकते हैं कि इंटरनेट एक-दूसरे से जुड़े कंप्यूटरों का एक विशाल और विश्वव्यापी नेटवर्क अथवा जाल है जिसमें तमाम संगठनों, विश्वविद्यालयों, संस्थाओं आदि के निजी और सरकारी कंप्यूटर आपस में जुड़े हुए रहते हैं। इंटरनेट आपस में जुड़े हुए कंप्यूटरों की एक जटिल किंतु एक व्यवस्थित वैश्विक प्रणाली है जिसमें जुड़े सभी कंप्यूटर इंटरनेट प्रोटोकॉल (Internet Protocol अथवा IP) के सहारे आपस में सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। इंटरनेट से जुड़े हुए प्रत्येक कंप्यूटर की अपनी एक अद्वितीय पहचान होती है जिसे उस कंप्यूटर का IP Address कहते हैं। IP Address गणितीय अंकों के एक विशेष संयोजन (जैसे 120.33.88.20) होता है।

इंटरनेट काम कैसे करता है ?

जैसे कि इस लेख में पहले ही बताया गया है कि इंटरनेट आपस में जुड़े हुए हजारों कंप्यूटरों की एक वैश्विक अंतर्जालीय प्रणाली है जिसमें जुड़े हुए सभी कंप्यूटर आपस में एक विशेष तकनीकी व्यवस्था के तहत सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। इस तकनीकी व्यवस्था के तहत एक कंप्यूटर पर किसी सूचना को छोटे-छोटे पैकेटों में तोड़ा जा सकता है तथा इंटरनेट नेटवर्क के माध्यम से दूसरे कम्प्यूटर पर इस प्रकार से भेजा जा सकता है कि सूचना के ये पैकेट दूसरे कम्प्यूटर पर पहुंच कर पुन: अपने मूल रूप में प्रदर्शित हो सकें। यह सूचनाएं या डाटा Image, Text, MP3, MP4, या किसी भी अन्य प्रकार की फाइलें हो सकती हैं जो एक वैश्विक नेटवर्क अर्थात  इंटरनेट के माध्यम से एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर तक पहुंचतीं हैं। अतः हम कह सकते है कि इंटरनेट का मुख्य कार्य कंप्यूटरों के बीच आपसी संवाद करना ही है। कंप्यूटरों का यह संवाद लगभग उसी तरह का है जैसे हमारे टेलीफ़ोन आपस में जुड़ कर संवाद करते हैं। अपने कंप्यूटर को इंटरनेट से जोड़ने के लिए आपको किसी इंटरनेट सेवा प्रदाता (Internet Service Provider -ISP) से निर्धारित शुल्क देकर एक इंटरनेट कनेक्शन किराए पर लेना पड़ेगा। यह ठीक वैसा ही है जैसे आप अपने मोबाइल फोन या लैंडलाइन फोन का कनेक्शन लेते है। सभी ISP इंटरनेट के विशाल नेटवर्क से जुड़े होते हैं और निर्धारित शुल्क के बदले केबल या वायरलेस नेटवर्क कनेक्शन के माध्यम से आपके कंप्यूटर या स्मार्ट फोन को इंटरनेट से जुड़ने का एक रास्ता उपलब्ध करा देते हैं। इस प्रकार इंटरनेट से जुड़ते ही Online हो जाते हैं और दुनिया भर के कंप्यूटरों से सूचनाओं या डाटा का स्थानांतरण कर सकते हैं।

कंप्यूटरों के मध्य इस तकनीकी संवाद को ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल (Transmission Control Protocol - TCP) कहा जाता है। सूचनाओं का यह आदान प्रदान दो से अधिक कंप्यूटरों के नेटवर्क के बीच भी हो सकता है। विभिन्न कंप्यूटरों के मध्य इस प्रकार के संवाद को संभव बनाने के लिए ज़मीन पर फाइबर केबल्स तथा ज़मीन के ऊपर अत्याधुनिक उपग्रह संचार प्रणाली की आवश्यकता होती है। इन्ही इलेक्ट्रॉनिक, वायरलेस, और ऑप्टिकल नेटवर्किंग प्रौद्योगिकियों के सहारे आँकड़ों अथवा सूचनाओं का संचार प्रकाश की गति के समान तेजी से होता है। हम तक यह संचरण टेलीफ़ोन के तारों और मोबाइल कनेक्शन के द्वारा पहुंचता है। इंटरनेट के द्वारा दुनिया भर में मौजूद असंख्य कम्प्यूटर सेकेंड से भी कम समय में एक-दूसरे से संवाद करके हमें वांछित सूचनाएं अथवा सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं। इंटरनेट द्वारा उपलब्ध सूचनाओं अथवा सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला है, जैसे इंटर लिंक किए गए हाइपरटेक्स्ट दस्तावेज़, वर्ल्ड वाइड वेब (www) या वेबपेज, इलेक्ट्रॉनिक मेल (e-mail), टेलीफ़ोनी तथा फ़ाइल शेयरिंग, आपसी बातचीत (ऑडियो तथा वीडियो कांफ्रेंसिंग) आदि प्रमुख हैं। इनके अलावा साथ-साथ सिनेमा, संगीत, वीडियो आदि भी इंटरनेट के माध्यम से उपलब्ध कराए जाते हैं। इंटरनेट में डाटा ट्रांसफर की यह पूरी संरचना एक क्लाइंट-सर्वर मॉडल पर आधारित होती है।
  • सर्वर ( Server) :-
कोई भी डिवाइस या कंप्यूटर जो क्लाइंट कंप्यूटरों को अनुप्रयोग या सेवाएं प्रदान करता है तथा किसी नेटवर्क के स्रोतों; जैसे प्रोग्राम और डाटा को व्यवस्थित करता है तथा एक केंद्रीय स्टोरेज उपलब्ध करता अर्थात जहां मूल डाटा (फाइलें) सुरक्षित (Save) रहती हैं उसे सर्वर कहते हैं। एक सर्वर एक ही समय में एक से अधिक क्लाइंटों को सेवा दे सकता है।
  • क्लाइंट Client :-
क्लाइंट किसी कंप्यूटर या कंप्यूटर प्रोग्राम को कहते हैं, जो किसी सर्वर की केंद्रीय स्टोरेज एरिया अर्थात जहां मूल डाटा (फाइलें) सुरक्षित (Save) रहती हैं वहां तक पहुंच बनाकर सर्वर द्वारा उपलब्ध सेवाओं को प्राप्त करता है। क्लाइंट सामान्यतः किसी साझा सार्वजनिक नेटवर्क के संसाधनों का उपभोग करता है तथा उसे सर्वर द्वारा स्वयं को प्रामाणीकृत (Authenticate) कराना पड़ता है। जिस प्रकार एक सर्वर कई अलग अलग क्लाइंटों को सेवा दे सकता है उसी प्रकार एक क्लाइंट भी कई अलग अलग सर्वरों की सेवा ले सकता है।

इंटरनेट का आविष्कार और विकास -

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इंटरनेट मालिक कौन ?

इंटरनेट पर किसी देश की सरकार या किसी एक संस्था विशेष का अधिकार नहीं है और न ही यह किसी एक द्वारा नियंत्रित होता है। यह एक अत्यंत विशाल और वैश्विक व्यवस्था है जो किसी सहकारिता तंत्र की भांति कार्यरत है। बेशक कोई एक व्यक्ति, कंपनी, संस्था अथवा सरकारी के पास इंटरनेट का मालिकाना हक़ या नियंत्रण नहीं है किंतु फिर भी कुछ एजेंसियां या संस्थाएं वैश्विक हित को ध्यान में रख कर इंटरनेट से संबंधित विभिन्न मुद्दों और पहलुओं पर सलाह देतीं है और इंटरनेट के समुचित परिचालन के लिए मानक या दिशा-निर्देश निर्धारित करतीं हैं। इस तरह से एक अंतरराष्ट्रीय और सामूहिक सहभागिता की व्यवस्था के तहत इंटरनेट आप तक पहुंचता है। इंटरनेट के विभिन्न क्षेत्रों लिए मानक और नियमों आदि का निर्धारण तथा रिसर्च करने वाला समूह World Wide Consortium (W3C) कहलाता है।

उल्लेखनीय है कि आपके घरों तक इंटरनेट पहुंचाने वाली कंपनियां (ISP) जैसे BSNL, Idea, MTNL, Vodafone, Jio, Rail tel इत्यादि इंटरनेट की मालिक नहीं हैं बल्कि अन्य कंपनियों के संसाधनों का उपयोग करके ये आप तक इंटरनेट पहुँचाती हैं। इन संसाधनों; जैसे समुद्र में बिछी फाइबर केबलों या ज़मीन के ऊपर संचार सैटेलाइटों के उपयोग के बदले ये कंपनियां संसाधनों के स्वामित्व वाली कंपनियों को शुल्क देती हैं तथा इसी प्रकार आपसे शुल्क वसूल कर आपको इंटरनेट उपलब्ध कराया जाता है।  

मानव जीवन पर इंटरनेट के प्रभाव -

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सारांश -

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2017-08-28

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Email Filter: आजकल के डिजिटल मार्केटिंग युग में हमें चाहे-अनचाहे सैकड़ों अवांछित ईमेल प्राप्त होते रहते हैं। इन्हीं Spam Mails के कारण हमारा Inbox भर जाता है और कभी-कभी हम अत्यंत महत्वपूर्ण और जरूरी ईमेल समय पर नहीं खोज पाते। कितना अच्छा हो यदि हमारे पास आने वाले सभी ईमेल जरूरी, गैर-जरूरी, स्पैम या हमारे द्वारा बनाई गई किसी अन्य कैटेगरी आदि में स्वतः ही वर्गीकृत हो जांए और सीधे इनबॉक्स में न आकर संबंधित फोल्डर में ही जांए। इस वर्गीकरण या Email Filtration से हमारा मेलबॉक्स तो व्यवस्थित रहेगा ही साथ ही महत्वपूर्ण ईमेल संदेशों को खोजने में समय और श्रम की भी बचत होगी।
जीमेल में लेबल और फिल्टर टैब
हालांकि Gmail ने अपने इनबॉक्स को Primary, Social, Promotions, Updates तथा Forums आदि श्रेणियों में विभाजित करने की सुविधा पहले ही उपलब्ध करा दी है। जीमेल आने वाले हर ईमेल संदेश की पहचान करके उसे संबंधित श्रेणी में विभाजित कर देता है। आप नीचे बताए गए तरीके से इस फीचर को चालू कर सकते हैं:-


Step-1:
दाहिने तरफ ऊपर कोने में अपने लॉगिन विवरण के नीचे Setting पर क्लिक करें।
जीमेल में फिल्टर कैसे लगाएं

Step-2:
Step-1 के बाद खुलने वाली विंडो में चित्र के अनुसार इनबॉक्स पर क्लिक करें और उसके बाद नीचे दिए गए विकल्पों (Options) के चेकबॉक्स पर टिक करके सलेक्ट कर लें।
जीमेल में फिल्टर कैसे लगाएं

Step-3:
पेज को नीचे स्क्रॉल करें और Save कर दें। अब अपने Gmail का Inbox खोल कर देखिए यह Primary, Social, Promotions, Updates आदि भागों (Tabs) में विभाजित होकर नीचे दिए गए चित्र के अनुसार दिखाई देगा। जीमेल अब हर संदेश की पहचान करके उसे संबंधित श्रेणी में स्वतः ही विभाजित कर देगा।
जीमेल में फिल्टर कैसे लगाएं

इसके अलावा भी यदि आपको अन्य फिल्टर लगाने हों जैसे, Office, Boss, Job या किसी व्यक्ति विशेष अथवा Email Address से आने वाले संदेश अपने आप ही संबंधित फोल्डर में चले जांए तो आप नीचे दिए गए दिशा-निर्देशों और बताई गई प्रक्रिया द्वारा आसानी से जीमेल में फिल्टर बना सकते हैं:-

Step-A:
  • पहले की भांति दाहिने तरफ ऊपर कोने में अपने लॉगिन विवरण के नीचे Setting पर क्लिक करें।
  • अब नीचे चित्र में बताए अनुसार Label पर क्लिक करें और नीचे स्क्रॉल करके Create Label पर क्लिक करें तथा खुलने वाली विंडो में वांछित सूचनाए अर्थात Label का नाम जैसे Office, Job आदि भरें। Create पर क्लिक करते ही आपका Label बन जाएगा। 
  • अब आप इस Label से अपने ईमेल संदेश लिंक करने के लिए तैयार हैं।


Step-B:
  • Label बना लेने के बाद आपको संबंधित Label के लिए Filter बनाना होगा। फिल्टर बनाने के लिए Filter and Blocked Addresses पर क्लिक करें।
  • अब Create a new filter पर क्लिक करें। नीचे दिए गए चित्र के अनुसार विंडो खुलेगी, इसमें आपको बड़े ध्यान से जानकारी भरनी है। जैसे किस Email Address से आने वाले मेल, किस विषय या किस शब्द के लिए के लिए आप फिल्टर बनाना चाहते हैं। 
  • सभी सूचनाएं भरने के बाद Create Filter with this Search >> पर क्लिक करें।

Step-C:
  • स्टेप-B के बाद आपको नीचे दिए गए चित्र के अनुसार विंडो दिखाई देगी। यहां आपको Apply the Label पर क्लिक करना होगा। 
  • इसके बाद Choose Label पर क्लिक करके स्टेप-A में बनाई गई Label का चयन करें।
  • अब Create Filter पर क्लिक करते ही आपका फिल्टर तैयार है।


अब जब भी आप अपना Gmail खोलेंगे तो आपको बांई तरफ पैनल में Inbox, Sent Mail आदि के नीचे आपके द्वारा बनाए गए फिल्टर से संबंधित Label का नाम भी दिखाई देगा। इस पर क्लिक करके आप इससे संबंधित ईमेल संदेश देख सकते हैं। इस तरह आपका मेलबॉक्स तो व्यवस्थित रहेगा ही साथ ही समय और ऊर्जा की भी बचत होगी।

उम्मीद है आपको ये जानकारी अच्छी लगी होगी। कृपया अपने कमेंट्स के माध्यम से हमें अवगत कराएं और इस लेख को अधिक से अधिक Share भी करें।

2017-08-25

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नोबल शांति पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी देश भर में बाल तस्करी और बाल यौन शोषण के खिलाफ आवाज उठाने तथा इस संबंध में एक सशक्त लड़ाई व जागरूकता का प्रसार करने के लिए एक ऐतिहासिक भारत यात्रा की शुरूआत कर रहे हैं। यह यात्रा 'सुरक्षित बचपन-सुरक्षित भारत के प्रति उनके विश्वास का प्रतीक है। 35 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से होकर गुजरेगी, जिसमें 1500 किलोमीटर का सफर तय किया जाएगा। दक्षिण में यात्रा की शुरूआत कन्याकुमारी से होगी और इसमें पूरे पश्चिम भारत को भी कवर किया जाएगा। इसी तरह देश के पूर्वी हिस्से में यात्रा की शुरूआत गुवाहाटी से होगी, जबकि उत्तर भारत में श्रीनगर से इसकी शुरूआत होगी। यात्रा का समापन 15 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में होगा। 
कैलाश सत्यार्थी की भारत यात्रा
कैलाश सत्यार्थी पिछले 36 वर्षों से दुनिया भर में बच्चों की आजादी, सुरक्षा और संरक्षा के लिए अभियान चला रहे हैं। उन्होंने 1998 में ऐतिहासिक ग्लोबल मार्च अगेंस्टग चाइल्ड लेबर की अगुआई की थी, जिससे प्रेरित होकर अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने बाल मजदूरी की सबसे खराब स्थिति के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन पारित किया। इसके साथ ही 2001 में शिक्षा यात्रा का नेतृत्व किया, जिसके बाद भारत के संविधान में शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार के तौर पर शामिल किया गया। प्रेरणादायी वैचारिक नेता के तौर पर उन्होंने हमारे देश की सामाजिक और राजनीतिक नीतियों को प्रभावित करने में उत्प्रेरक भूमिका निभाई है। बच्चों के अधिकारों के लिए उनके अनथक प्रयासों और संघर्ष के लिए उन्हें वर्ष 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1893 में शिकागो में महान नेता स्वामी विवेकानंद के भाषण की सालगिरह की याद में इस यात्रा को 11 सितंबर को कन्याकुमारी के विवेकानंद मेमोरियल से रवाना किया जाएगा।


पीड़ित बच्चों  के माता-पिता के साथ भारत यात्रा की घोषणा करते हुए श्री कैलाश सत्यार्थी ने कहा, “आज मैं बाल यौन शोषण और तस्करी के खिलाफ युद्ध का ऐलान करता हूं। आज मैं भारत यात्रा की घोषणा कर रहा हूं, जो कि बच्चों के लिए भारत को फिर से सुरक्षित बनाने के लिए इतिहास का सबसे बड़ा आंदोलन होगा। मैं यह स्वीकार नहीं कर सकता कि हमारे बच्चों की बेगुनाही, मुस्क़राहट और आजादी छिनती रहे या उनका बलात्कार किया जाता रहे। यह साधारण अपराध नहीं है। यह एक नैतिक महामारी है जो हमारे देश को सता रही है।

पिछले चार दशकों के दौरान बच्चों की सुरक्षा के लिए कुछ सबसे बड़े नागरिक आंदोलन के शिल्पकार रहे श्री सत्यार्थी का आजीवन मिशन, बच्चों के खिलाफ सभी प्रकार की हिंसा को समाप्त करना है। श्री सत्यातर्थी और उनका फाउंडेशन कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन्स फाउंडेशन सितंबर में इस यात्रा को शुरू करने के लिए कई महीनों से जमीन तैयार कर रहे हैं। इस सिलेसिले में श्री सत्यार्थी ने देश भर में यात्राएं कीं और नागरिकों, धार्मिक नेताओं, कर्मचारियों तथा कॉर्पोरेट्स, सांसदों, सामाजिक संगठनों आदि से मुलाकात की और सभी ने पूरे दिल से भारत यात्रा का समर्थन करने का वचन दिया और इसे हमारे देश के लिए एक आवश्यक लड़ाई करार देते हुए इस इस नेक कार्य की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।


हाल ही में उन्होंने दिल्ली में सांसदों से मुलाकात कर बाल तस्करी और बाल यौन शोषण के मुद्दे पर जानकारी दी और इस खतरे के प्रति जागरूकता फैलाने में उनका समर्थन मांगा। पिछले महीने उन्होंने बेंगलुरू में LinkedIn के 500 से ज्यादा कर्मचारियों से बात की और LinkedIn जैसे कॉर्पोरेट्स को हमारे देश के भविष्य के लिए मजबूत रुख अपनाने की जरूरत के लिए प्रेरित किया। वह नई दिल्ली में कई धर्मों के प्रमुखों के साथ भी बैठक कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इस लड़ाई में देश भर में समाज के सभी वर्गों का साथ मिले। दिल्ली में इस यात्रा से पर्दा उठाया गया जिसमें भारत यात्रा से संबंधित एक वीडियो जारी किया गया, जिसमें देश भर के बच्चों की स्वतंत्रता, सुरक्षा और संरक्षा के लिए एकजुट होने और लड़ने की अपील की गई है। इस अभियान के द्वारा देश के एक करोड़ लोगों तक पहुंचने की उम्मीद है।


भारत यात्रा बच्चों का बलात्कार और बाल यौन शोषण के खिलाफ तीन साल के अभियान की शुरूआत है, जिसका उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना और मामलs दर्ज करने, चिकित्सा स्वास्थ्य और मुआवजा सहित सुनवाई के दौरान पीड़ितों और गवाहों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा बाल यौन शोषण के दोषियों को समयबद्ध सजा दिलाने के मामलों में तेजी लाने के लिए संस्थाकगत प्रतिक्रिया को सुदृढ़ बनाना है।

इस लॉन्च में तस्करी और दुर्व्यवहार के शिकार बच्चों के परिवारों को भी दिखाया गया है, जिसमें उन्होंने बताया है कि कुछ लोगों के गलत व्यवहार की वजह से उन्हें किस तरह भावनात्मक और शारीरिक आघात का सामना करना पड़ा। परिवारों ने भी इस अभियान में समर्थन का वचन दिया और उम्मीद जताई कि यह अभियान क्रांति लाएगा। बच्चों के शोषण के खिलाफ देश को अपनी लड़ाई जारी रखना समय की अनिवार्य जरूरत बन गई है।

नोट: यह लेख तृतीय पक्ष द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर लिखा गया है। हिंदी ई-टूल्स || Hindi e-Tools का इससे कोई सीधा संबंध नहीं है।

2017-08-24

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टेलीकॉम मार्केट में आने के साथ ही Reliance Jio ने धूम मचा दी है। पहले Jio SIM फिर Free DATA और एक बार फिर Jio Mobile Phone के साथ मार्केट में तहलका मचाने को तैयार है। आज यानी 24 अगस्त 2017 शाम 5:30 बजे से जियो फोन की Pre booking शुरू हो चुकी है। 15 अगस्त इस से फोन की बीटा टेस्टिंग हो रही थी और अब Reliance Jio ने इसे प्री-बुकिंग के जरिए आम लोगों के लिए उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है। रिलायंस का लक्ष्य एक सप्ताह में 40 से 50 लाख जियो फोन बेचने का है। तो आइए रिलायंस जियो के 4जी फीचर फोन और इसकी बुकिंग के बारे में विस्तार से जानते हैं।

Reliance Jio 4G Feature Phone

प्री-बुकिंग (Pre Booking):
Jio Phone की की बुकिंग 2 तरीके से होगी अर्थात ऑनलाइन और ऑफलाइन। खास बात ये है कि देशभर में एक व्यक्ति सिर्फ एक यूनिट ही बुक कर सकता है। अगर आप एक से फोन यूनिट बुक करना चाहते हैं तो आपको अपने संस्थान का पैन या जीएसटीएन नंबर देना होगा।


ऑनलाइन माध्यम से बुकिंग (Online Bokking) -
सबसे पहले ऑनलाइन बुकिंग की बात करते हैं। अगर आप ऑनलाइन बुक करना चाहते हैं तो रिलायंस 4जी फीचर फोन की ऑनलाइन बुकिंग रिलायंस जियो के MyJio App अथवा www.jio.com वेबसाइट पर की जा सकती है। जियोफोन की ऑनलाइन बुकिंग के लिए ऐप का एक्सेस ना रखने वालों को नजदीकी अधिकृत ऑफलाइन जियो रिटेलर के पास जाकर अपनी किस्मत आजमानी होगी।

ऑफलाइन यानी जियो रिटेलर/ दुकानों के माध्यम से बुकिंग (Offline Booking) -
अगर ऑफलाइन बुकिंग की बात करें तो देश भर में करीब 700 शहरों में रिलायंस डिजिटल के लगभग 1,996 आउटलेट्स हैं जबकि रिलायंस जियो के 1,072 सेंटर भी बनाए गए हैं। यहां सभी जगह जियो के फ्री 4जी फीचर फोन की बुकिंग की जा सकती है। अधिकृत दुकानों से फोन बुक करने के लिए आपको 500 रुपये देने होंगे और डिलीवरी के समय आपसे 1,000 रुपये और लिए जाएंगे। इसके अलावा आप फोन की प्री-बुकिंग जियो स्टोर या रिलायंस डिजिटल स्टोर से भी कर सकते हैं। अच्छी बात यह है कि प्री-बुकिंग के दौरान यहां आपको कोई पैसा नहीं देना होगा।

जरूरी दस्तावेज (Essential Documents):
जियो फोन की ऑफलाइन प्री बुकिंग अर्थात दुकान से फोन बुक करने के लिए आपको अपने आधार कार्ड की फोटो कॉपी और एक फोटो देने होंगे। उसके बाद फोन बुक हो जाएगा और आपको एक टोकन मिल जाएगा। फोन लेते समय आपको टोकन देना होगा और उसी समय आपको फोन की सिक्योरिटी राशि देनी होगी जिसे आप 3 साल बाद फोन वापस करके ले सकते हैं।

ध्यान दें कि एक आधार कार्ड पर केवल एक ही फोन लिया जा सकता है। यह फोन पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर दिया जाएगा।

कीमत अथवा सिक्योरिटी डिपॉज़िट (Price or Security Deposit):
रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन मुकेश अंबानी के मुताबिक, जियो फोन के लिए ग्राहक को कोई कीमत नहीं चुकानी होगी, लेकिन यूज़र को इसके लिए सिक्योरिटी के तौर पर 1,500 रुपये जमा करने होंगे जो तीन साल बाद वापस मिल जाएंगे यानी फोन की प्रभावी कीमत शून्य होगी।


डिलीवरी (Delivery):
जब जियो फोन लॉन्च किया गया था तब बताया गया था कि फोन की डिलीवरी सितंबर माह में होगी, लेकिन किस तारीख से होगी यह तब नहीं बताया गया था। खबरों के अनुसार माना जा रहा है कि अभी बुक करने वाले ग्राहकों को फोन की डिलीवरी 1 सितंबर से लेकर 4 सितंबर के बीच शुरू की जाएगी, हालांकि यह भी हो सकता है कि ज्यादा बुकिंग के कारण फोन की डिलीवरी में देर भी हो जाए। अगर आप जियो 4जी फ़ीचर फोन को अपने हाथों में देखना चाहते हैं, तो बेहतर होगा कि जितनी जल्दी हो सके बुकिंग करा लें।

फीचर (Reliance 4G Feature Phone Specifications):
बात करें Jio Phone के फीचर्स की तो इस फोन में निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध हैं:-
  • 2.4 इंच QVGA Screen
  • 4 GB इनबिल्ट स्टोरेज
  • 512 एमबी RAM
  • न्यूमेरिक कीपैड
  • 4 नेविगेशन बटन
  • माइक्रोएसडी स्लॉट
  • फोटोग्राफी के लिए 2 मेगापिक्सल का रियर कैमरा
  • सेल्फी के लिए VGA कैमरा
  • टॉर्च लाइट
  • एफएम रेडियो
  • ब्लूटूथ
  • नेविगेशन
इसके अलावा इसमें जियो टीवी और जियो सिनेमा जैसे ऐप पहले से इंस्टॉल होंगे जिनके माध्यम से आप 6,000 से ज्यादा फिल्में तथा 60,000 से ज्यादा म्यूजिक वीडियो का आनंद उठा सकते हैं। जियो म्यूजिक पर 20 भाषाओं में 1 करोड़ से ज्यादा गानों के उपलब्ध होने का दावा किया है।

सबसे खास बात है यह फोन 22 भारतीय भाषाओं जैसे आसामी, बोडो, डोगरी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलूगू और उर्दू आदि को सपोर्ट करेगा।


Reliance Jio 4G Feature Phone में 0 बटन दबाकर इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस फोन में यूट्यूब वीडियो, म्यूजिक डाउनलोड, न्यूज अपडेट, एजुकेशन मैटिरियल, फेसबुक, मैट्रिमनियल, राशिफल, वॉलपेपर डाउनलोड, जॉब सर्च, मौसम आदि की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। जियो फोन को एक टीवी-केबल एक्सेसरी के जरिए किसी भी तरह के टीवी से कनेक्ट किया जा सकेगा। यानी फोन के कंटेट को आप आसानी से बड़े स्क्रीन पर देख सकते हैं।

कंपनी ने आने वाले सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए एनएफसी सपोर्ट और यूपीआई के जरिए टैप-एंड-पे पेमेंट और क्रेडिट व डेबिट कार्ड को लिंक कर पाएंगे।

उम्मीद है कि ऊपर दी गई जानकारी से आपको जियो फोन और इसकी बुकिंग आदि से जुड़े अपने कई सवालों के जवाब मिल गए होंगे। Jio Phone में एक सिम के लिए ही सपोर्ट होगा। जियो फोन सिर्फ 4G पर काम करने वाला हैंडसेट है। इसमें फोन कॉल वॉयस ओवर एलटीई (VOLTE) तकनीक के ज़रिए होते हैं। आपको पता ही होगा कि अभी भारत में रिलायंस जियो ही अकेली ऐसी कंपनी है जो 4जी वीओएलटीई नेटवर्क देती है। इसका मतलब है कि सिर्फ इस कंपनी के सिम कार्ड ही फोन पर काम करेंगे, यानी जियो फोन पर एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया और बीएसएनएल के सिम इस्तेमाल करने के बारे में भूल जाइए। वैसे, एयरटेल ने जानकारी दी है कि वह जल्द ही वॉयस ओवर एलटीई सेवा की शुरुआत करेगी। लेकिन जियो फोन में सिम लॉक होना निश्चित माना जा रहा है।

2017-08-21

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मध्य प्रदेश के शहर इंदौर में आजकल कैफे भड़ास की चर्चा खूब चल रही है। भड़ास भारत का ऐसा पहला कैफे है जहां आप अपने तरीके से अपने गुस्से उससे जुड़ी निराशा, जलन व चिड़चिड़ाहट इत्यादि नकारात्मक भावों को व्यक्त कर सकते हैं अर्थात अपनी भड़ास खुलकर निकाल सकते हैं।। वह भी पूरी सुरक्षा व गोपनीयता के साथ ताकि आपके व्यावसायिक एवं पारिवारिक रिश्तों पर कोई असर न हो।

Bhadas Cafe Indore

प्रत्येक शहर की अपनी एक पहचान होती है। यह पहचान उसकी कुछ विशेषताओं जैसे एतिहासिक स्मारक, खान-पान, मार्केट या अन्य कुछ खासियत से बनती है। इंदौर को मालवा का गौरव और मिनी मुंबई कहा जाता है। किंतु इस शहर का दिल आज भी राजवाड़ा में ही धड़कता है। राजवाड़ा सिर्फ होल्कर कालीन महल ही नहीं है यहां के चौक में शहर के बाशिदों की जान बसती है। जश्न मनाना हो, विरोध प्रकट करना हो या दुःख में हों, सभी अवसरों पर राजवाड़ा पूरे शबाब पर होता है, फिर चाहे आधी रात का भी समय क्यों न हो तब भी यहों का उत्साह कम नहीं होता है। अब भड़ास कैफे ने राजवाड़ा के जोश और उत्साह को और बढ़ा दिया है।
आधुनिक इंदौर में भड़ास कैफे शहर की पहचान बन गया है। यह भारत का ऐसा पहला कैफे है जहां आपके गुस्से को व्यक्त करने के लिए विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। यहां पर आप न केवल तोड़फोड़ करके, चिल्लाकर अथवा रोकर अपना गुस्सा व्यक्त कर सकते हैं बल्कि गुस्से को शांतिपूर्ण तरीके से अन्य सकारात्मक दिशाओं में मोड़ने के लिए उपलब्ध विशेष सुविधा के कारण इसे विश्व का अपनी तरह का पहला कैफे भी माना जा रहा है।
भड़ास में सुरक्षा व्यवस्था के साथ आप एकदम अकेले में ऑफिस, परिवार, दोस्त या प्रेमी के प्रति अपने गुस्से को व्यक्त करने के लिए उनसे संबंधित सामान को पूरी ताकत से तोड़फोड़ सकते हैं। रोने, चिल्लाने व अपशब्दों का प्रयोग भी करें तो भी कोई दूसरा नहीं सुनेगा। इस तरह आपके मन की भड़ास निकल जाएगी। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि गुस्सा सबसे अधिक एनर्जी वाला नेगेटिव इमोशन है और इसे सही दिशा में मोड़ दिया जाए तो रचनात्मक एनर्जी बन सकती है। भड़ास में आप संगीत के वाद्य यंत्र बजाकर पेन्टिंग करके, बचपन के खेलों से या अन्य पसंदीदा काम करके अपनी एनर्जी को सकारात्मक दिशा में मोड़ दे सकते हैं। यकीन मानिए इतनी सारी खूबियों के साथ भड़ास आधुनिक इंदौर की पहचान बन गया है, जैसे राजवाड़ा के बिना इंदौर की कल्पना नहीं की जा सकती है वैसे ही आने वाले समय में भड़ास के बिना इंदौर अधूरा लगेगा। आप शहर की इस नई पहचान को स्वयं तो देखिए ही बाहर से आने वाले लोगों को भी इससे रूबरू कराइए।
जब कोई भड़ास पर आता है तो स्वयं ही अपने गुस्से को बाहर निकालने के लिए तत्पर हो जाता है। अभी तक इंदौर में आने वाली कई बड़ी हस्तियों ने भड़ास का अवलोकन किया है और इसे इंदौर की नई पहचान बताया है।

इस कैफे के बारे में और अधिक जानकारी के लिए आप अतुल मलिकराम से फोन नंबर 9755020247 पर संपर्क कर सकते हैं। 

नोट: यह लेख तृतीय पक्ष द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर लिखा गया है। हिंदी ई-टूल्स || Hindi e-Tools का इससे कोई सीधा संबंध नहीं है।

2017-04-06

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हिंदी साहित्य के काल विभाजन और नामकरण में आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा तत्कालीन युगीन प्रवृत्तियों को सर्वाधिक प्राथमिकता दी गई है। विभिन्न प्रवृत्तियों की प्रमुखता के आधार पर ही उन्होने साहित्य के अलग-अलग कालखण्डों का नामकरण किया है। इसी मापदंड को अपनाते हुए हिंदी साहित्य के उत्तर मध्य काल अर्थात 1700-1900 वि. के कालखण्ड में रीति तत्व की प्रधानता होने के कारण शुक्ल जी ने इस कालखण्ड को ‘रीति काल’ नाम दिया।

riti kal ka namkarn picture graph
इस समय अवधि में अधिकांश कवियों द्वारा काव्यांगों के लक्षण एवं उदाहरण देने वाले ग्रंथों की रचना की गई। अनेक हिंदी कवियों द्वारा आचार्यत्व की शैली अपनाते हुए लक्षण ग्रंथों की परिपाटी पर अलंकार, रस, नायिका भेद आदि काव्यांगों का विस्तृत विवेचन किया गया। रीति की यह धारणा इतनी बलवती थी कि कवियों /आचार्यों के मध्य इस बात पर भी विवाद होता थी कि अमुक पंक्ति में कौन सा अलंकार, रस, शब्दशक्ति या ध्वनि है। इन्ही सब तत्वों या प्रवृत्तियों को ध्यान में रखते हुए उत्तर मध्य काल का नामकरण ‘रीतिकाल’ के रूप में किया गया।


‘रीति’ शब्द से अभिप्रायः-

  • भारतीय काव्य शास्त्र में प्रचलित काव्य के छ: संप्रदायों में से एक प्रमुख संप्रदाय है, जिसके प्रवर्तक ‘आचार्य वामन’ हैं।
  • आचार्य वामन ने ‘विशिष्टपद रचना रीति:’ कहते हुए ‘विशेष पद रचना’ को रीति माना है।
  • उन्होने ‘रीति’ शब्द को व्यापक रूप में अर्थ ग्रहण करते हुए काव्य रचना संबंधी समस्त नियमों और सिद्धांतों, रस, अलंकार, ध्वनि आदि विभिन्न तत्वों को ग्रहण करते हुए इसे काव्य की आत्मा घोषित किया है।
  • संभवतः रीति कालीन आचार्यों द्वारा रीति का यही व्या‍पक रूप ग्रहण किया गया और उन्होने इसी आधार पर विभिन्न काव्यांगों का निरूपण करने वाले काव्य ग्रंथों की रचना की।
  • अत: हिंदी में ‘रीति’ शब्द का संस्कृत अर्थ न लेते हुए यहां ‘काव्यांग निरूपण’ करने वाले लक्षण ग्रंथों से ही लिया गया है।

‘रीतिकाल’ नाम पर आपत्तिः-

हिंदी साहित्य के अनेक आलोचक और इतिहासकार शुक्ल जी के नामकरण से पूर्णतः सहमत नहीं हैं। उनके अनुसार ‘रीति’ शब्द उत्तर मध्य काल की सभी प्रवृत्तियों अथवा विशेषताओं को व्यक्त करने में समर्थ नहीं है। विभिन्न विद्वानों द्वारा साहित्य के इस कालखण्ड को शृंगार काल, कला काल, अलंकृत काल तथा अंलकार काल आदि नाम देते हुए अपने मत व्यक्त किए गए और इनके समर्थन में अनेक तर्क प्रस्तुत दिए गए।

देखा जाए तो कला काल, अलंकृत काल व अलंकार काल में कोई विशेष भिन्नता नहीं हैं तथा ‘रीति’ से भी अधिक अंतर नहीं हैं। ‘शृंगार काल’ नाम अवश्य ही ‘रीति’ से कुछ पार्थक्य सूचित करता है। कुछ विद्वानों को रीति काल में घनानंद, ठाकुर, बोधा आदि द्वारा रची गयी शृंगारिक रचनाओं को रीतिमुक्त होने के कारण रीतिकाल में लाने से हिचक है। शृंगार काल नाम देने से यह हिचक स्वत: ही समाप्त हो जाती है।

आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र तथा डा. नागेन्द्र ने ‘रीति’ शब्द को संकुचित अर्थ में ग्रहण करते हुए इसे ‘काव्य रीति’ का संक्षिप्त रूप ही माना है और इसकी अनुपयुक्तता सिद्ध करने का प्रयास किया है। आचार्य मिश्र का तर्क - ‘विचार करने पर रीति ग्रंथ प्रणेता अधिकतर आचार्य सिद्ध नहीं होते। इन्होंने रीति का पल्ला सहारे के लिए पकड़ा, कहना ये चाहते थे ‘शृंगार’ ही।

समग्रता से विश्लेषण किया जाए तो मिश्र जी द्वारा दिया गया यह तर्क पूर्णता के द्योतक नहीं हैं क्योंकि रीतिकाल में वीर रस के प्रसिद्ध कवियों और नीति काव्य के प्रणेताओं में शृंगार लेशमात्र भी नहीं हैं। सूक्ष्म दृष्टि से देखने पर वीर रस, नीति अथवा स्वछंद काव्य रचयिताओं की काव्य सर्जना प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ‘रीति’ से अवश्य प्रभावित रही हैं।

रीतिकाल के अन्य नामः-

अनेक विद्वान शुक्ल जी द्वारा दिए गए इस नाम से असहमत हैं और उन्होने रीतिकाल के अन्य नाम सुझाए हैं। कुछ विद्वानों ने दिए गए प्रमुख नाम निम्नलिखित हैंः-
  1. मिश्रबंधु : अलंकृत काल
  2. आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र : शृंगार काल
  3. आचार्य चतुरसेन शास्त्री : अलंकार काल
  4. रमाशंकर शुक्ल ‘रसाल’ : कला काल
अनेक विद्वान रीति नाम से ही सहमत हैं, यद्यपि शृंगार काल में भी विशेष अनौचित्य नहीं हैं। फिर भी कई कारणों से रीतिकाल नाम ही विशेष प्रचलित और सर्वमामन्य हो सका। अतः निष्कर्ष रूप में देखा जाए तो ‘रीतिकाल’ नाम देना ही अधिक उचित‍ व तर्कसंगत प्रतीत होता है और संयोग से शुक्ल जी द्वारा दिया गया यह नाम ही सर्वाधिक लोकप्रिय और प्रचलित हुआ।