Tuesday, July 5, 2016

हिन्दी साहित्य का इतिहास : काल विभाजन एवं नामकरण

इतिहास के काल विभाजन का आधार एवं उद्देश्य :

  • विभिन्न प्रकाशित, अप्रकाशित रचनाओं के साथ ही साथ विद्वानों द्वारा तमाम आलोचनात्माक व शोधपरक ग्रंथों और रचनाओं व रचनाकारों का परिचय देने वाली अनेक कृतियों को भी कालविभाजन और नामकरण की आधार सामग्री के रूप में लिया गया।
  • समग्र साहित्य को खंडों, तत्वों, वर्गों आदि में विभाजित कर अध्ययन को वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान करने में काल विभाजन सहायक।
  • अंग, उपांग तथा प्रवृत्तियों को समझने एवं स्पष्टता लाने के लिए आवश्यक।

काल विभाजन के आरंभिक प्रयास :

  • 19वीं सदी से पूर्व विभिन्न कवियों और लेखकों द्वारा चौरासी वैष्णवन की वार्ता, दो सौ बावन वैष्णवन की वार्ता, भक्तमाल, कविमाला आदि जैसे कई ग्रंथों में हिन्दी कवियों के जीवनवृत्त और रचना कर्म का परिचय देकर हिन्दी साहित्य के इतिहास और कालक्रम को आधार देने के प्रयास किए जाते रहे हैं. 
  • किंतु हिंदी साहित्य इतिहास के काल विभाजन के आरंभिक प्रयासों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रयास गार्सा द तांसी के ‘इस्तवार द लितुरेत्यूर ऐन्दुई ऐ ऐन्दुस्तानी’, जॉर्ज ग्रियर्सन के ‘द मॉर्डन वर्नाक्यूलर ऑफ हिन्दुस्तान’ मौलवी करीमुद्दीन के तजकिरा-ई-शुअरा-ई-हिंदी (तबकातु शुआस) तथा शिवसिंग सेंगर द्वारा लिखित इतिहास ग्रंथ ‘शिवसिंग सरोज’ में किए गए।
  • गार्सा द तांसी के ग्रंथ ‘इस्तवार द लितुरेत्यूर ऐन्दुई ऐ ऐन्दुस्तानी’ को अधिकांश विद्वान हिंदी का प्रथम इतिहास मानते हैं।
  • प्रथम तर्क संगत प्रयास सन 1934 ई. में मिश्र बंधुओं (पं. गणेश बिहारी मिश्र, डॉ. श्याम बिहारी मिश्र एवं डॉ. शुकदेव बिहारी मिश्र ) द्वारा किया गया ।

मिश्रबंधुओं का काल विभाजन :

मिश्रबंधुओं द्वारा अपनी रचना 'मिश्रबंधु-विनोद' (1913 में तीन भाग तथा 1929 में चौथा भाग) में हिंदी साहित्य के इतिहास को निम्नलिखित 5 भागों और उप-भागों में बांटा गया है: -
  1. आरंभिक काल :
      • पूर्वारंभिक काल :  (700 - 1343 वि.)
      • उत्तरारंभिक काल : (1344 - 1444 वि.)
  2. माध्यमिक काल :
      • पूर्वमाध्यमिक काल : (1445 - 1560 वि.)
      • प्रौढ़ माध्य काल : (1561 - 1680 वि.)
  3. अलंकृत काल :
      • पूर्वालंकृत काल : (1681 - 1790 वि.)
      • उत्तरालंकृत काल : (1791 - 1889 वि.)
  4. परिवर्तन काल : (1890 - 1925 वि.)

  5. वर्तमान काल : (1925 वि. से अब तक )

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का काल विभाजन:

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्बारा 1929 में 'हिन्दी साहित्य का इतिहास' नामक ग्रंथ में किए गए काल विभाजन को ही अब तक सर्वाधिक प्रमाणिक और तार्किक माना जाता रहा है। यह इतिहाल ग्रंथ मूलत: नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित 'हिन्दी शब्द सागर' की भूमिका के रूप में लिखा गया था। उन्होने सम्पूर्ण हिंदी साहित्य को निम्नलिखित चार भागों में विभाजित किया है: -
  1. वीरगाथा काल : (1050 - 1375 वि.)
  2. भक्ति काल : (1375 - 1700 वि.)
  3. रीति काल : (1700 - 1900 वि.)
  4. गद्य काल : (1900 वि. से आगे...)
  • काल विभाजन को सर्वथा नवीन रूप तथा कालों की संख्या सीमित ।
  • अधिकांश विद्वानों द्वारा स्वीकृत, स्पष्ट तथा तर्कसंगत काल विभाजन ।

डॉ. राम कुमार वर्मा का काल विभाजन :

सन् 1938 में प्रकाशित 'हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास' में डॉ. राम कुमार वर्मा ने हिंदी साहित्य के इतिहास का काल विभाजन निम्नानुसार किया है: -
  1. संधि काल : (750 - 1000 वि.)
  2. चारण काल : (1000 - 1375 वि.)
  3. भक्ति काल : (1375 - 1700 वि.)
  4. रीति काल : (1700 - 1900 वि.)
  5. आधुनिक काल : (1900 वि. से आगे...)

  • केवल वीरगाथा काल को चारण काल कहा, शेष आचार्य रामचन्द्र शुक्ल द्वारा किए गए विभाजन के ही अनुरूप।
  • वस्तुत: देखा जाए तो वीरगाथाएँ चारणों द्वारा ही गाईं जातीं थीं।
  • संधि काल में स्पष्टता का अभाव ।

डॉ. गणपति चन्द्र गुप्त का काल विभाजन:

सन् 1938 में प्रकाशित 'हिन्दी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास' (दो भाग) में डॉ. गणपति चन्द्र गुप्त ने शुक्ल जी की मान्यताओं का सतर्क खंडन करते हुए हिंदी साहित्य के इतिहास को प्रमुख रूप से निम्नलिखित भागों में विभाजित किया है :-
  1. प्रारम्भिक काल : (1189 - 1350 ई.)
  2. मध्य काल :
    • पूर्व मध्य काल : (1350 - 1600 वि.)
    • उत्तर मध्य काल : (1600 - 1857 वि.)
  3. आधुनिक काल : (1857 वि. से आगे...)

'एफ. ई . के' द्वारा किया गया काल विभाजन :

वृत्त संग्रहों को आधार मानकर कई अन्य विद्वानों ने भी काल विभाजन का प्रयास किया है। यहां 'एफ. ई . के' द्वारा किया गया काल विभाजन उल्लेखनीय है।
  1. प्राचीन चारण काव्य : ( 1150 - 1400 वि. )
  2. प्राचीन भक्त काव्य : ( 1400 - 1550 वि. )
  3. कबीर के उत्तराधिकारी : ( 1550 - 1750 वि. )
  4. आधुनिक काल : ( 1800 वि. से आगे...)

विभिन्न विद्वानों के विविध मत :

भक्तिकाल और आधुनिक काल के संबंध में विद्बानों में अधिक मतभेद नहीं हैं। केवल वीरगाथा काल और रीतिकाल के नामकरण को लेकर ही कुछ आलोचकों को आपत्ति है। इन कालों के नामकरण के संबंध में कुछ प्रमुख विद्वानों के मत निम्नलिखित हैं।
  • वीरगाथा काल: सिद्ध सामंत युग (राहुल सांकृत्यायन), आदिकाल (डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी), अपभ्रंशकाल (चंद्रधर शर्मा गुलेरी), बीजवपनकाल (महावीर प्रसाद द्विवेदी) आदि।
  • रीतिकाल: कला काल (रमाशंकर शुक्लं ‘रसाल’), शृंगार काल (आचार्य विश्वदनाथ प्रसाद मिश्र), अलंकृत काल (मिश्रबंधु) आदि।

प्रतियोगी परीक्षाओं और स्व-अध्ययन के लिए हिंदी साहित्य की उपयोगी पुस्तकें की सूची। आप यहाँ से ऑनलाइन भी खरीद सकते है:

Vastunishth Hindi: Sahitya & Vyakaran Hindi Sahitya Aur Samvedana Ka Vikas Hindi Sahitya Ka Tathyaparak Adhyayan Trueman's UGC NET Hindi Sahitya Hindi Sahitya Ka Saral Itihas Hindi Sahitya Ka Saral Itihas
हमारे सभी लेख सीधे अपने ईमेल में प्राप्त करें

9 comments:

  1. बहुत ही सरल शब्दों में अच्छी जानकारी..धन्यवाद

    ReplyDelete
  2. बहुत सुंदर उदयवीर जी । आपका hindietools के रूप में यह प्रयास बाकई प्रशंसनीय है । बधाई एवं शुभकामनाएं ।

    ReplyDelete
    Replies
    1. धन्यवाद राकेश जी,
      इस प्रयास को सफल बनाने में आपके जैसे गुणी मित्रों के सहयोग की अपेक्षा हमेशा बनी रहेगी। यदि आपके पास या अन्य साथियों के पास हिंदी से संबंधित कोई उपयोगी जानकारी, तकनीकी आलेख आदि हो तो साभार नाम के साथ अथवा अतिथि लेखक के रूप में यहां प्रकाशित किया जा सकता है।

      Delete
  3. Shukriya sir.bahut upayukt mahiti hain. Such me badiya hain sir.

    ReplyDelete
  4. Shukriya sir.bahut upayukt mahiti hain. Such me badiya hain sir.

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका धन्यवाद...
      नियमित रूप से विजिट करते रहेंं..हम आपको हमेशा उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास करते रहेंगे।

      Delete
  5. बहुत ही सराहनीय प्रयास !

    ReplyDelete
  6. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  7. हिन्दी को किताबी घेरे से डिजीटल दुनिया की ओर लेने जाने आपका प्रयास सराहनीय है । ‘द मॉर्डन वर्नाक्यूलर ऑफ हिन्दुस्तान’ के स्थान पर पुस्तक का नाम ‘द मॉर्डन वर्नाक्यूलर ऑफ नॉर्दर्न हिंन्दुस्तानी’ पढ़ा था, एकबार देख लें ।

    ReplyDelete