Monday, October 1, 2018

Internet : परिचय तथा मानव जीवन पर इंटरनेट का प्रभाव

इंटरनेट आज के समय का एक ऐसा आविष्कार है जिसने पूरी दुनिया को बदल कर रख दिया है। यह इंटरनेट का ही कमाल है कि आज हम पूरी दुनिया को एक वैश्विक गांव (Global Village) के रूप में देखते हैं। इंटरनेट, वर्ल्ड वाइड वेब (www) या सूचना प्रौद्योगिकी के कारण ही आज सूचनाओं, संदेश अथवा डाटा का आदान-प्रदान इतनी तीव्र गति से होने लगा है कि कभी-कभी हमें यह कल्पना मात्र प्रतीत होता है। आइए ! इंटरनेट क्या है, इसका आविष्कार किसने किया, इंटरनेट का मालिक कौन है, इंटरनेट कैसे काम करता है, इंटरनेट के लाभ एवं हानि तथा मानव जीवन और समाज पर इसके व्यापक प्रभाव आदि के बारे में कुछ विस्तार से जानते हैं: -

इंटरनेट की परिभाषा :-

इंटरनेट शब्द का हिंदी अनुवाद अंतरजाल होता है लेकिन अधिकतर सभी भाषाओं में इसका मूल अंग्रेज़ी शब्द INTERNET ही व्यापक प्रचलन में है। संक्षिप्त रूप में इंटरनेट को ‘नेट’ भी कहा जाता है। जैसा कि हम जानते हैं 'नेट (Net)' का अर्थ जाल होता है; वास्तव में इंटरनेट भी एक जाल ही तो है। प्रसिद्ध सूचना वेबसाइट विकीपीडिया के अनुसार - "इंटरनेट विश्व में डिवाइसों / कंप्यूटरों को लिंक करने के लिए इंटरनेट प्रोटोकॉल सूट (TCP / IP) का उपयोग करने वाले इंटरकनेक्टेड (आपस में जुड़े हुए) कंप्यूटर नेटवर्क की एक वैश्विक प्रणाली है। यह नेटवर्क का एक नेटवर्क है जिसमें निजी, सार्वजनिक, शैक्षिक, व्यवसायिक और वैश्विक नेटवर्क शामिल हैं, जो कि इलेक्ट्रॉनिक, वायरलेस, और ऑप्टिकल नेटवर्किंग प्रौद्योगिकियों की व्यापक श्रेणी से जुड़ा हुआ है।"

अगर सरल शब्दों में कहें तो हम कह सकते हैं कि इंटरनेट एक-दूसरे से जुड़े कंप्यूटरों का एक विशाल और विश्वव्यापी नेटवर्क अथवा जाल है जिसमें तमाम संगठनों, विश्वविद्यालयों, संस्थाओं आदि के निजी और सरकारी कंप्यूटर आपस में जुड़े हुए रहते हैं। इंटरनेट आपस में जुड़े हुए कंप्यूटरों की एक जटिल किंतु एक व्यवस्थित वैश्विक प्रणाली है जिसमें जुड़े सभी कंप्यूटर इंटरनेट प्रोटोकॉल (Internet Protocol अथवा IP) के सहारे आपस में सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। इंटरनेट से जुड़े हुए प्रत्येक कंप्यूटर की अपनी एक अद्वितीय पहचान होती है जिसे उस कंप्यूटर का IP Address कहते हैं। IP Address गणितीय अंकों के एक विशेष संयोजन (जैसे 120.33.88.20) होता है।

इंटरनेट काम कैसे करता है ?

जैसे कि इस लेख में पहले ही बताया गया है कि इंटरनेट आपस में जुड़े हुए हजारों कंप्यूटरों की एक वैश्विक अंतर्जालीय प्रणाली है जिसमें जुड़े हुए सभी कंप्यूटर आपस में एक विशेष तकनीकी व्यवस्था के तहत सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। इस तकनीकी व्यवस्था के तहत एक कंप्यूटर पर किसी सूचना को छोटे-छोटे पैकेटों में तोड़ा जा सकता है तथा इंटरनेट नेटवर्क के माध्यम से दूसरे कम्प्यूटर पर इस प्रकार से भेजा जा सकता है कि सूचना के ये पैकेट दूसरे कम्प्यूटर पर पहुंच कर पुन: अपने मूल रूप में प्रदर्शित हो सकें। यह सूचनाएं या डाटा Image, Text, MP3, MP4, या किसी भी अन्य प्रकार की फाइलें हो सकती हैं जो एक वैश्विक नेटवर्क अर्थात  इंटरनेट के माध्यम से एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर तक पहुंचतीं हैं। अतः हम कह सकते है कि इंटरनेट का मुख्य कार्य कंप्यूटरों के बीच आपसी संवाद करना ही है। कंप्यूटरों का यह संवाद लगभग उसी तरह का है जैसे हमारे टेलीफ़ोन आपस में जुड़ कर संवाद करते हैं। अपने कंप्यूटर को इंटरनेट से जोड़ने के लिए आपको किसी इंटरनेट सेवा प्रदाता (Internet Service Provider -ISP) से निर्धारित शुल्क देकर एक इंटरनेट कनेक्शन किराए पर लेना पड़ेगा। यह ठीक वैसा ही है जैसे आप अपने मोबाइल फोन या लैंडलाइन फोन का कनेक्शन लेते है। सभी ISP इंटरनेट के विशाल नेटवर्क से जुड़े होते हैं और निर्धारित शुल्क के बदले केबल या वायरलेस नेटवर्क कनेक्शन के माध्यम से आपके कंप्यूटर या स्मार्ट फोन को इंटरनेट से जुड़ने का एक रास्ता उपलब्ध करा देते हैं। इस प्रकार इंटरनेट से जुड़ते ही Online हो जाते हैं और दुनिया भर के कंप्यूटरों से सूचनाओं या डाटा का स्थानांतरण कर सकते हैं।

कंप्यूटरों के मध्य इस तकनीकी संवाद को ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल (Transmission Control Protocol - TCP) कहा जाता है। सूचनाओं का यह आदान प्रदान दो से अधिक कंप्यूटरों के नेटवर्क के बीच भी हो सकता है। विभिन्न कंप्यूटरों के मध्य इस प्रकार के संवाद को संभव बनाने के लिए ज़मीन पर फाइबर केबल्स तथा ज़मीन के ऊपर अत्याधुनिक उपग्रह संचार प्रणाली की आवश्यकता होती है। इन्ही इलेक्ट्रॉनिक, वायरलेस, और ऑप्टिकल नेटवर्किंग प्रौद्योगिकियों के सहारे आँकड़ों अथवा सूचनाओं का संचार प्रकाश की गति के समान तेजी से होता है। हम तक यह संचरण टेलीफ़ोन के तारों और मोबाइल कनेक्शन के द्वारा पहुंचता है। इंटरनेट के द्वारा दुनिया भर में मौजूद असंख्य कम्प्यूटर सेकेंड से भी कम समय में एक-दूसरे से संवाद करके हमें वांछित सूचनाएं अथवा सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं। इंटरनेट द्वारा उपलब्ध सूचनाओं अथवा सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला है, जैसे इंटर लिंक किए गए हाइपरटेक्स्ट दस्तावेज़, वर्ल्ड वाइड वेब (www) या वेबपेज, इलेक्ट्रॉनिक मेल (e-mail), टेलीफ़ोनी तथा फ़ाइल शेयरिंग, आपसी बातचीत (ऑडियो तथा वीडियो कांफ्रेंसिंग) आदि प्रमुख हैं। इनके अलावा साथ-साथ सिनेमा, संगीत, वीडियो आदि भी इंटरनेट के माध्यम से उपलब्ध कराए जाते हैं। इंटरनेट में डाटा ट्रांसफर की यह पूरी संरचना एक क्लाइंट-सर्वर मॉडल पर आधारित होती है।
  • सर्वर ( Server) :-
कोई भी डिवाइस या कंप्यूटर जो क्लाइंट कंप्यूटरों को अनुप्रयोग या सेवाएं प्रदान करता है तथा किसी नेटवर्क के स्रोतों; जैसे प्रोग्राम और डाटा को व्यवस्थित करता है तथा एक केंद्रीय स्टोरेज उपलब्ध करता अर्थात जहां मूल डाटा (फाइलें) सुरक्षित (Save) रहती हैं उसे सर्वर कहते हैं। एक सर्वर एक ही समय में एक से अधिक क्लाइंटों को सेवा दे सकता है।
  • क्लाइंट Client :-
क्लाइंट किसी कंप्यूटर या कंप्यूटर प्रोग्राम को कहते हैं, जो किसी सर्वर की केंद्रीय स्टोरेज एरिया अर्थात जहां मूल डाटा (फाइलें) सुरक्षित (Save) रहती हैं वहां तक पहुंच बनाकर सर्वर द्वारा उपलब्ध सेवाओं को प्राप्त करता है। क्लाइंट सामान्यतः किसी साझा सार्वजनिक नेटवर्क के संसाधनों का उपभोग करता है तथा उसे सर्वर द्वारा स्वयं को प्रामाणीकृत (Authenticate) कराना पड़ता है। जिस प्रकार एक सर्वर कई अलग अलग क्लाइंटों को सेवा दे सकता है उसी प्रकार एक क्लाइंट भी कई अलग अलग सर्वरों की सेवा ले सकता है।

इंटरनेट का आविष्कार और विकास -

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इंटरनेट मालिक कौन ?

इंटरनेट पर किसी देश की सरकार या किसी एक संस्था विशेष का अधिकार नहीं है और न ही यह किसी एक द्वारा नियंत्रित होता है। यह एक अत्यंत विशाल और वैश्विक व्यवस्था है जो किसी सहकारिता तंत्र की भांति कार्यरत है। बेशक कोई एक व्यक्ति, कंपनी, संस्था अथवा सरकारी के पास इंटरनेट का मालिकाना हक़ या नियंत्रण नहीं है किंतु फिर भी कुछ एजेंसियां या संस्थाएं वैश्विक हित को ध्यान में रख कर इंटरनेट से संबंधित विभिन्न मुद्दों और पहलुओं पर सलाह देतीं है और इंटरनेट के समुचित परिचालन के लिए मानक या दिशा-निर्देश निर्धारित करतीं हैं। इस तरह से एक अंतरराष्ट्रीय और सामूहिक सहभागिता की व्यवस्था के तहत इंटरनेट आप तक पहुंचता है। इंटरनेट के विभिन्न क्षेत्रों लिए मानक और नियमों आदि का निर्धारण तथा रिसर्च करने वाला समूह World Wide Consortium (W3C) कहलाता है।

उल्लेखनीय है कि आपके घरों तक इंटरनेट पहुंचाने वाली कंपनियां (ISP) जैसे BSNL, Idea, MTNL, Vodafone, Jio, Rail tel इत्यादि इंटरनेट की मालिक नहीं हैं बल्कि अन्य कंपनियों के संसाधनों का उपयोग करके ये आप तक इंटरनेट पहुँचाती हैं। इन संसाधनों; जैसे समुद्र में बिछी फाइबर केबलों या ज़मीन के ऊपर संचार सैटेलाइटों के उपयोग के बदले ये कंपनियां संसाधनों के स्वामित्व वाली कंपनियों को शुल्क देती हैं तथा इसी प्रकार आपसे शुल्क वसूल कर आपको इंटरनेट उपलब्ध कराया जाता है।  

मानव जीवन पर इंटरनेट के प्रभाव -

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सारांश -

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